गाँव में तालाब कब्जाने के 100 तरीके!
तालाब सबके हैं — इसलिए सब कब्जाना चाहते हैं ।
सबसे पहले कब्जा कौन करता है?

वही लोग, जिनका घर या खेत तालाब के किनारे होता है — मतलब जिन पर इसे बचाने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है।
कब्जे की शुरुआत कैसे होती है?

पहले तालाब के कोने में गोबर, राख, और बचा हुआ चारा डाल दिया जाता है।

कुछ महीनों में वहाँ ज़मीन जैसी जगह बन जाती है।

फिर वहाँ भैंसें बाँध दी जाती हैं या ट्रॉली भर मिट्टी डाल दी जाती है।

धीरे-धीरे ईंट लगाकर दीवार उठाई जाती है, और देखते-देखते तालाब का एक हिस्सा "घर" बन जाता है।

कुछ सालों में पूरा तालाब ही गायब हो जाता है — और फिर गाँव में जलभराव शुरू हो जाता है।
विडंबना यह कि उसी वक्त जल भराव होने पर गाँव वाले ग्राम प्रधान को गालियाँ देते हैं, जबकि कब्जा करने वाले भी वही लोग होते हैं।
जब प्रशासन कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो
खुद ग्राम प्रधान नही करने देते क्योंकी कब्जाने वाले कुछ लोग उसके वोटर हैं ।

कुछ अब कोर्ट में जाकर "गरीबी" का बहाना लगाते है, कोर्ट स्टे लगा देती है , अगले दस साल बस तारीख लगती है तब तक तालाब पूरा गायब हो जाता है ।

और सबसे ज़्यादा फायदा होता है उस लेखपाल को, जिसे हर महीने "मिठाई" पहुँचने लगती है।
आज सैकड़ों गाँव ऐसे हैं जहाँ

तालाबों पर कब्जे या कचरे के ढेर ने उन्हें खत्म कर दिया है,

और अब वही गाँव हर साल बाढ़ और जलभराव झेल रहे हैं।
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